बुधवार, 25 अगस्त 2010

क्या लौटेगा मेरा बचपन


जिन्दगी के इतने साल कैसे निकल जातें हैं पता ही नहीं चलता/ पहले पढने-लिखने की जद्दोजहद फिर कुछ बनने की आस/ जिन्दगी की इसी उधेड़-बुन में बचपन कब रोते-बिलखते सो जाता है याद नहीं रहता/ ऐसा नहीं है  के उसे फिर से उठाने का मौका नहीं मिलता पर तब तक इस गलाकाट प्रतिस्पर्धा के कारण जिन्दगी इतनी मैली हो चुकी होती है शायद हिम्मत नहीं होती उस सुन्दर, सरल, निष्पाप और बेफिक्र दुनिया में जाने की और खुद से आँख मिलाने की
पर जब से कोरिया आया हूँ पहले से ज्यादा सोचने लगा हूँ  सीधा- कारण है- भाषा अवरोध/ वो लोग इंग्लिश भी ठीक तरह से नहीं जानते तो हिंदी का तो प्रश्न ही नहीं उठता, परिणाम- वक्त की बहुलता/ मेरा मानना हैं कि शरीर में दो चीजे हैं जो वक्त के साथ- चलती रहती हैं- मस्तिक्ष और ह्रदय, रूकती हैं तो जिन्दगी रुक जाती है/ और खालीपन मस्तिष्क की उर्वता को और बढ़ा देता है यहाँ के लोग अपने काम के प्रति बेहद इमानदार हैं और सबसे बड़ी बात है कि ईर्षाभाव नहीं हैं/ काम के प्रति तो मैं हमेशा से ईमानदार रहा हूँ (हा हा हा...) और द्वेष के लियें यहाँ कोई है नहीं लिहाजा मेरा जो कुछ भी मैलापन था दूर हो गया/ अभी कुछ वक्त है!! पर महसूस कर रहा हूँ अपने अन्दर मेरा सोया बचपन भी अंगडाई लेकर उठने को है, तैयार हूँ!!! मैं भी, दोनों हाथ फैलाये, उसे गले लगाने को................................
सनसनी पर सुना था
"चैन से सोना है तो जाग जाईये" पर मैं तो कहता हूँ
"आनंद से जीना है तो सोये बचपन को जगाइए"

4 टिप्‍पणियां:

  1. Wow!!! great, Achchha laga aapko likte dekhkar, der se hi par at last u r here. Soft and honest thoughts, as usual :)

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  2. बहुत खूब.
    मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन, वो काग़ज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी.
    समय का सदुपयोग करना है तो चिठ्ठा लिखते रहें.

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  3. I think that the childhood is really the happiest time of people's life. As a child the things are simple. You have someone to take care of you and your only purpose in life is to do whatever you want to do. who would not enjoy that?

    He does not know anything about the world. And must find everything about it. Have you ever looked a child’s face when he discovers something? He is smiling and laughing.

    as a child, with friends comes the craziest ideas, which you would turn into practice, in your life. To climb the trees, to broke some windows or whatever your crazy little brain could think of.

    But every time you look back you start appreciating the chance you have had to be a kid and to do all the things you do. And you suddenly realize that this was the happiest time of your life.

    Praveen has brought this simple feelings in his blog, everyone who reads it would definitely wants to go back to childhood. He is privileged to have enjoyed a happy childhood and that he has brought out very beautifully. Simple and beautiful way of putting it.

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